Symptoms of Mental Illness

March 5th, 2015

मानसिक बीमारी के लक्षण

जिस तरह से मत्रिमंडल का मुखिया प्रधानमंत्री होता है उसी तरह से मन हमारे शरीर रूपी मंत्रिमंडल का मुखिया है। प्रधानमंत्री अगर चुस्त-दुरस्त है तो मंत्रिमंडल भी वैसा ही होगा। इसी तरह से अगर हमारा मन स्वास्थ है तो शरीर के बाकि हिस्से भी सुचारू रूप से काम करेंगे। अगर हमारा मन स्वस्थ नहीं है तो शरीर बेमतलब है । इसका कोर्इ औचित्य नहीं है। क्योंकि शरीर की सारी कि्रया मन से ही शुरू होती है और वहीं खत्म होती है। आम तौर पर जब व्यकित मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है तो उसके अचार- व्यवहार ,रंग -ढ़़ंग उसकी सोच , बोल चाल व क्षमता में परिर्वतन हो जाता है। समय रहते यदि इस मानसिक अस्वस्थता का सही इलाज न हो तो व्यकित पागल हो सकता है या आत्महत्या तक कर सकता है।
मानसिक अस्वस्थता के लक्षण विचारों में उलझे रहना या एकाग्रता की कमी डर या चिंता का बना रहना दोस्तों और रिश्तेदारों के संपर्क में न रहना समस्याओं का सामना न कर पाना और तनावग्रस्त हो जाना हर काम में हमेश अपनी गलती महसूस होना खाने की आदत में बड़ा बदलाव होना मन में बेवजह आत्महत्या का विचार आना,कारण इस तरह के ज्यादातर मामलों में सही कारण का पता नहीं चलता है। कुछ शोध के अनुसार मानसिक अस्वस्थता के कर्इ कारण हैं जो निम्नलिखित है।

इस तरह के कर्इ मामलों के लिए कुछ जीन भी जिम्मेदार होते हैं । यानी मां-बाप या कोर्इ अन्य नजदीकी रिश्तेदार इस बीमारी से पीडि़त रहा हो तो उनके जीन आने वाले पीढ़ी में भी पहुंच जाते हैं।
जन्म से पहले का प्रभाव यदि बच्चे की मां गर्भावस्था के दौरान धुम्रपान या शराब का सेवन करती है तो पैदा होने वाला बच्चा दिमागी रूप से अस्वस्थ हो सकता है।
जीवन के नकारात्मक अनुभव जीवन के नकारात्मक अनुभव भी कर्इ बार मानसिक अस्वास्थ्ता के कारण हो सकते हैं। अक्सर देखा गया है कि प्यार में कामयाब न होने , आर्थिक परेशानी या फिर ज्यादा तनाव भी इसका कारण है।
दिमाग पर असर कर्इ बार किसी बीमारी या समस्या के चलते दिमाग में जैविकीय परिर्वतन होने पर व्यकित दिमागी रूप से अस्वस्थ हो जाता है।

मनोवैज्ञानिक कारण व्यकित के दिमागी रूप से अस्वस्थ होने के पीछे कर्इ बार मनोवैज्ञानिक आघात भी होते हैं। शारीरिक व यौन प्रताड़ना भी कर्इ बार दिमाग को प्रभावित करती है। 70 प्रतिशत आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार है मानसिक अस्वस्थता

मानसिक बीमारियों के चलते आज हर जगह अपराध , आत्महत्याएं ,तलाक व घरेलू हिंसा की घटनाएं हो रही है। एक अनुमान के अनुसार करीब 70 प्रतिशत आत्महत्याओं का कारण आर्थिक न हो कर मानसिक हैं। इसी तरह से 60 से 70 प्र्रतिशत घरेलु हिंसा व तलाक के पीछे भी मानसिक परेशानी ही है।

2011 में हुआ 2. 5 टि्रलियन डालन का नुक्सान स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के अनुसार 2011 तक अमरीका में 45.6 मिलियन युवा मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं जो कुल जनसंख्या का 19.6 प्रतिशत है। उन में से 11.5 प्रतिश गंभीर रूप से गंभीर रूप से इस बीमारी के शिकार हैं। उलेखनीय है कि महिलाओं की इस बीमारी से पुरूशों के मुकाबले प्रभावित होने के 50 प्रतिशत संभावना ज्यादा होती है। मानसिक अस्वस्थ्ता के चलते जहां व्यकित पारिवारिक समस्याअें जैसे घरेलु हिंसा ,कलह ,तलाक व संबंधों जैसी समस्याओं से दो चार होता है वहीं राश्ट्रीय स्तर पर इसका आर्थिक दुश्परिणाम भी पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2010 में इस बीमारी पर कुल 2. 5 टि्रलियन डालन का खर्च आया था। संगठन के अनुमान के अनुसार 2030 तक इसके 6 टि्रलियन हो जाने की उम्मीद है जबकि अमरीका में उसी साल 113 बिलियन डालर खर्च आया जो कुल बजट का 5.6 प्रतिशत है।

मानसिक अस्वस्थ्ता की समस्या का हल बदलती जीवन शैली और आर्थिक परिवेश में हर देश के मनुश्य की प्राथमिकताएं उसकी रूचि , खान,पान व अन्य सामाजिक सरोकारों में बदलाव हुआ है। ऐसे में यह बीमारी भी अब वैशिवक हो गर्इ है, पर अभी तक इस समस्या का पक्का इलाज संभव नहीं है। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों का कहना है कि इससे छुटकारे के लिए जितनी भी विधियों का इस्तेमाल किया उनमें से त्रिवेदी प्रभाव की विधि ही उन्हें सही लगी । उल्लेखनीय है कि इस अनूठी विधि की खोज महेन्द्र त्रिवेदी ने की है । लोग उन्हें प्यार से गुरूजी भी कहते हैं। उन लोगों का कहना है कि त्रिवेदी प्रभाव के जरिए गुरू जी पीडि़त व्यकित में विशेश किस्म की ऊर्जा का संचरण करते हैं। इस संचरण के बाद व्यकित मानसिक रूप से इतना मजबूत हो जाता है कि मानसिक विकार जैसी बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि त्रिवेदी प्रभाव से उन्हें कर्इ बीमारियों जैसे तनाव ,वैवाहिक संबंधों में कड़वाहट ,चिंता , एकाग्रता में कमी ,व्यापार में धाटा , यौन संबंधों में असंतुषिट ,अवसाद, कैंसर , आत्मविश्वास में कमी व आंतरिक अशांति से भी छुटकारा मिला। उल्लखनीय है कि त्रिवेदी प्रभाव के माध्यम से ऊर्जा संचरण की क्षमता अब तक केवल दो लोगों गोपाल नायक व डेहरियन त्रिवेदी में है। त्रिवेदी प्रभाव से विश्व के अबतक लाखों लोग लाभानिवत हो चुके हैं। इस ऊर्जा संचरण का लाभ ले चुके लोगों का कहना है कि जैसे ही गुरू जी ऊर्जा को किसी व्यकित विशेष में जैसे-जैसे प्रषित करते हैं वैसे -वैसे उसकी आत्मा का संबंध ब्रम्हांड की परम सत्ता से ओर गहरा हो जाता है। जैसे -जैसे यह संबंध गहराता जाता है वैसे-वैसे उसके दिल और दिमाग में अज्ञान रूपी धुंध के बादल छंटने शुरू हो जाते है। अंत में एक अवस्था ऐसी आती है जहां उसके सारे द्धंद ,दु,ख ,रोग व मानसिक विकार खत्म हो जाते हैं।