Depression Symptoms and Solutions

March 5th, 2015

अवसाद के लक्षण व समाधान

सब कुछ होते हुए भी मनुश्य का मन बेचैन है। जब कुछ नहीं था तब भी वह असंतुश्ट था और जब सब कुछ है तब भी । सोते -जागते सब कुछ बटोर लेने की इच्छा। एक इच्छा पूरी होती है , दस नयी पैदा हो जाती है। मन रूपी आकाश में इच्छाओं के बादल रह-रह कर उमड़ रहे हैं। मन जितना अनियंत्रित होगा उतनी ही इच्छाएं इसमें पैदा होंगी। मन की गति पर मनुश्य का कोर्इ नियंत्रण नहीं है। वह पूरी तरह से बेलगाम हो चुका है। जिस अनुपात में इच्छाएं मनुश्य के मन पैदा हो रही है उस अनुपात में उनकी पूर्ति नहीं हो रही है। मनुश्य जैसा सोच रहा है वैसा नहीं हो रहा है । नतीजन उस पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है , जिससे वह अवसाद में है। हर आदमी हैसियत से ज्यादा सुख व संपनता चाहता है। इस लिए अवसाद की यह बीमारी सर्वव्याप्त हो गर्इ है। कर्इ बार हमारे जीवन में ऐसा कुछ होता है जिससे हमारा मन दुखी हो जाता है। मन उदास हो जाता है लेकिन अगर उदासी का यह एहसास जब स्थायी हो जाए तो समझ लो कि आप अवसादग्रस्त हो गए हो । मैडी लेकिसीयन के चिकित्सा शब्दकोश के अनुसार अवसाद एक ऐसी मानसिक सिथति या स्थायी विकार है जिसमें व्यकित को उदासी ,अकेलापन , निराशा, कम आत्मसम्मान , और आत्मप्रतारणा महसूस होती है । इसके अतिरिक्त समाज से कटना , भूख की कमी व नींद न आना भी अवसाद की निशानी है।

अवसाद के प्रकार
अवसाद एक ही तरह का नहीं होता है। यह कर्इ प्रकार का होता है।
अति अवसाद विकार
इस तरह के अवसाद से पीडि़त व्यकित पूरी तरह से इसकी चपेट में होता है । वह न तो सही ढ़ग से काम कर सकता है और न सो सकता है ,न पढ़ सकता है , न ढ़ग से खा सकता है और न ही मनोरंजक गतिविधियों में भाग ले सकता है।
मानसिक अवसाद
इस तरह के अवसाद की अवधि लंबी होती है जो 2 साल या इससे ज्यादा हो सकती है लेकिन इस तरह के अवसाद का ज्यादा प्रभाव पीडि़त पर नहीं पड़ता है। इस अवसाद से पीडि़त व्यकित को सामान्य ढंग से काम करने में समस्या आती है।
मामूली अवसाद  

इस अवसाद का प्रभाव करीब 2 सप्ताह या इससे अधिक रहता है। वैसे तो यह पीडि़त को ज्यादा प्रभावित नहीं करता है लेकिन अगर समय रहते इसका इलाज न करवाया जाए तो यह हानिकारक हो सकता है।
मनोवैज्ञानिक अवसाद
इस तरह के अवसाद से पीडि़त व्यकित अनजान भय , अविश्वास शक या किसी अन्य मानसिक विकार का शिकार हो जाता है।
मौसमी अवसाद
इस तरह के अवसाद का असर पीडि़त को मौसम में परिर्वतन के अनुसार होता है। उदाहरण के लिए किसी पर बसंत में व किसी पर शरद में इस अवसाद का असर पड़ता है।
अवसाद के लक्षण
नींद न आना, एकाग्रता की कमी, असहाय महसूस करना, भूख न लगाना, जीवन का नीरस लगना, हर वक्त नकारात्मक विचार पैदा होना , बहुत अधिक गुस्सा करना व चिड़चिड़ापन महसूस करना
हर साल अमरीका में करीब 6.7 प्रतिशत यानी 15 मिलियन लोग अति अवसाद का शिकार होते हैं।
अवसाद से क्या होता है नुक्सान
अवसाद की वजह से संबंधों में कड़वाहट , कलह ,आर्थिक नुक्सान, यौन संबंधों में असंतुशिट , हीन भावना , तनाव गस्त हो जाता है व सामाजिक गतिविधियों से पूरी तरह से विमुख हो जाता है। अमरीका जैसे देशों में अवसाद तलाक की मुख्य वजह है। इसके अलावा यहां बच्चों में बढ़ रही अपराध की भावना के लिए भी अवसाद ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है। यही नहीं जब आदमी पूरी तरह से इसके शिकंजे में आता है तो वह कुछ भी करने में असहाय हो जाता है जिससे उसमें हीन भावना घर कर जाती है और वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने से भी गुरेज नही करता है।
त्रिवेदी प्रभाव है अवसाद की समस्या का हल
इस बीमारी का सबसे भयवाह पहलू यह है कि विज्ञान के पास भी इसका निदान नहीं है। वैज्ञानिकों का भी यही मानना है कि इस तरह की मानसिक बीमारियों का पक्का इलाज विज्ञान के पास नहीं है।
इस बीमारी से पीडि़त लोगों का कहना है कि उन्होंने हर वैज्ञानिक तरीके से इस बीमारी का इलाज करवाया लेकिन कोर्इ असर नहीं हुआ। उनके अनुसार त्रिवेदी प्रभाव से उन्हेें अवसाद जैसी जटिल मानसिक बीमारियों से छुटकारा मिला। गौरतलब है कि त्रिवेदी प्रभाव की खोज महेन्द्र त्रिवेदी ने की है। प्यार से उनके अनुयायी उन्हें गुरू जी कहकर पुकारते हैं। अब तक जो लोग गुरू जी के त्रिवेदी प्रभाव का अनुभव ले चुके हैं उनके अनुसार गुरू जी इस प्रभाव के माध्यम से पीडि़त व्यकित के शरीर में एक खास किस्म की ऊर्जा का संचरण करते हैं। उसके बाद उस व्यकित पर ऊर्जा का ऐसा चमत्कारिक प्रभाव पड़ता है कि अवसाद के अतिरिक्त उसकी सारी मानसिक ,शारीरिक व अर्थिक समस्यों का हल चुटकी में हो जाता है। अब तक लाखों लोग गुरू जी द्धारा खोजी गर्इ इस ऊर्जा संचरण विधि का अनुभव हासिल कर चुके हैं। उनके अनुसार इस अनुभव के बाद उन्हें अवसाद के अतिरिक्त अनिद्रा , सुस्ती, मनोदैहिक विकार , त्चचा की समस्याएं ,पाचन में विकार, चिड़चिड़ापन , व्यर्थ की चिंता , आत्मविश्वास व जोश की कमी, संबंधों में कडवाहट ,यौन संबंधों में असंतुषिट ,गम चोट , अनिद्रा , मासिक धर्म व मानसिक विकार आदि से छुटकारा मिल गया है।
उल्लेखनीय है कि महेन्द्र त्रिवेदी की इस खोज पर विश्व के तीन दर्जन से ज्यादा देशों के चुनिंदा वैज्ञानिकों ने 4000 के करीब शोध व अध्ययन कर त्रिवेदी प्रभाव की वैधता पर मोहर लगार्इ । यही नहीं वैज्ञानिकों ने श्री महेन्द्र त्रिवेदी की शारीरिक व मानसिक संरचना को जानने के लिए भी उन पर कर्इ शोध व अध्ययन किए। शोधों के बाद वैज्ञानिक यह जानकर हतप्रद हैं कि उनके पूरे शरीर का तापमान एक जैसा नहीं है। हर हिस्से का तापमान अलग हैै। इसमें सबसे हैरत वाली बात यह है कि उनके शरीर में जो तापमान है वह सामान्य से इतना ज्यादा है कि अगर साधारण व्यकित के शरीर में उतना तापमान हो तो वह लकवाग्रस्त हो सकता है या कौमा में जा सकता है। यही नहीं उनका दिमाग व शरीर की संरचंना इतनी मजबूत है कि ऐसा लगता है कि उनकी उम्र 20 साल की हो।